इसे पिता- पुत्र और उनके परिवार पर ईश्वर की कृपा कहें, या LOST FOUND PERSON अभियान एवं बाल कल्याण समिति, जयपुर (राजस्थान) के प्रयासों का नतीजा कहें या फिर गुजरात सरकार के राजकोट चिल्ड्रन होम के अधिकारियों की दुआओं का असर, कि फिल्मी स्टाइल में 10 साल बाद जून, 2018 में पिता- पुत्र और परिवार का मिलन हो पाया।
यह कहानी इटावा (उत्तर प्रदेश) में रहने वाले विशाल की है, जो 10 साल पहले अपने पिता के थप्पड़ मारने से नाराज होकर अपने मामा के घर कानपुर जाने के लिए निकला और गलत ट्रेन में बैठने के कारण कानपुर के बजाय जामनगर (गुजरात) जा पहुंचा।
यूं चला घटनाक्रम -
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लगभग सन् 2008 में अपने पिता के थप्पड़ मारने से नाराज होकर 10 वर्षीय विशाल इटावा (उत्तर प्रदेश) स्थित अपने घर से अपने मामा के यहाँ कानपुर जाने के लिए निकला, लेकिन गलत ट्रेन में बैठकर कानपुर के बजाय जामनगर (गुजरात) जा पहुँचा।
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विशाल के परिवार द्वारा विशाल को काफी तलाश भी किया गया, परन्तु नहीं मिलने पर परिवार हताश होकर बैठ गया।
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आर.पी.एफ., जामनगर ने विशाल को स्टेशन पर भटकते हुए पकड़ा और बाल कल्याण समिति (सी.डब्ल्यू.सी.) के आदेशानुसार विशाल को चाइल्ड होम में आवासित किया गया। बच्चे द्वारा इटावा, जयपुर शब्द बोले गये।
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एक से दूसरे होम में स्थानान्तरित होते हुए विशाल 11 जून, 2009 को राजकोट चिल्ड्रन होम में स्थानान्तरित किया गया और तभी से विशाल राजकोट में ही आवासित रहा।
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राजकोट चिल्ड्रन होम के अधिकारीगण द्वारा विशाल के परिवार की तलाश के प्रयास करते हुए सन् 2018 में इसका प्रकरण LOST FOUND PERSON अभियान की जानकारी में लाया गया और अभियान द्वारा बाल कल्याण समिति, जयपुर के सहयोग से प्रयास प्रारंभ किये गये।
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इन 10 वर्षो में विशाल की सारी यादें धुंधली हो चुकी थी और यहाँ तक कि हिन्दी भाषा को भी भूलकर गुजरातीभाषी हो चुका था।
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विशाल की फाइल पर इटावा, जयपुर लिखा होने के कारण विशाल को राजकोट से मई, 2018 में जयपुर भिजवाया गया। यहाँ LOST FOUND PERSON अभियान के संस्थापक राहुल शर्मा और बाल कल्याण समिति (सी.डब्ल्यू.सी.), जयपुर द्वारा विशाल की काउसिलिंग की गई।
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भाषा संबंधी समस्या के कारण विशाल को जयपुर रखने के स्थान पर वापस राजकोट भेजा गया और LOST FOUND PERSON अभियान द्वारा बाल कल्याण समिति, जयपुर के सहयोग से नये सिरे से प्रयास प्रारंभ किये गये।
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अंततः जून, 2018 में प्रथम सप्ताह में इटावा (उत्तर प्रदेश) में विशाल का परिवार खोज निकाला गया।
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9 जून, 2018 को विशाल सैनी के पिता महेन्द्र सैनी और अन्य परिवारजन राजकोट पहुंचे और उनका विशाल के साथ भावनात्मक मिलन हुआ।
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विशाल के पिता की प्रसन्नता और भावुकता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वे इटावा (उत्तर प्रदेश) से विशाल को लेने के लिए राजकोट (गुजरात) पहुँचे और विशाल की सुपुर्दगी के बाद वापस सीधे इटावा जाने के बजाय केवल LOST FOUND PERSON के संस्थापक राहुल शर्मा से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनका धन्यवाद ज्ञापित करने के लिए विशाल के साथ जयपुर (राजस्थान) से होते हुए इटावा गये।
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इस अकल्पनीय प्रयास के लिए गुजरात सरकार द्वारा भी LOST FOUND PERSON को धन्यवाद पत्र प्रदान किया गया।
संस्थापक के शब्द -
‘‘विशाल के परिवार की तलाश हमारे लिए बहुत ही ज्यादा चुनौतीपूर्ण थी। बिछुडने के समय उम्र कम होना और उस घटना को भी 10 वर्ष बीत जाना सबसे बडी चुनौती थी क्योंकि इसके कारण यादें स्वाभाविक रूप से धुंधली पड़ चुकी थी। विशाल की फाइल पर उस समय इटावा, जयपुर लिख दिया जाना भी हमारे लिए बडी चुनौती बन गई थी क्योंकि विशाल खुद तो कुछ बता नहीं पा रहा था और जयपुर (राजस्थान) के आस-पास इटावा नामक कई गाँवों में हमने बहुत प्रयास कर लिये थे।
विशाल को राजकोट (गुजरात) से जयपुर (राजस्थान) भेजे जाने और खुद मेरे द्वारा उसकी काउंसिलिंग किये जाने से इस पूरे मामले की दिशा ही बदल गई। यह भी सुखद संयोग ही था, कि जो पुलिस टीम विशाल को राजकोट से जयपुर लेकर आई थी, उनमें एक पुलिसकर्मी राजस्थान से होने के कारण वह गुजराती और हिन्दी दोनों भाषा जानता था, इसलिए विशाल की काउंसिलिंग संभव हो सकी। काउंसिलिंग के दौरान मुझे यह भी अहसास हुआ कि खुद विशाल का भी मन चाइल्ड होम में लग चुका था और वह भी वहां से जाना नही चाहता था। बड़ी मुश्किल से लगभग 2-3 घंटे की लगातार काउंसिलिंग के आधार पर हमारे प्रयास उत्तर प्रदेश के इटावा की तरफ घूमे और फिर तो, लगभग 15 दिन के अथक प्रयासों के बाद हमारे द्वारा विशाल का परिवार खोज निकाला गया।
विशाल के पिता की नजरों में जो खुशी और आभार झलक रहा था, उसे शब्दों में व्यक्त किया जाना संभव ही नहीं है। इसका अंदाजा महज इस बात से लगाया जा सकता है कि वे LOST FOUND PERSON की सूचना के आधार पर अपने बेटे को लेने के लिए इटावा (उत्तर प्रदेश) से सीधे राजकोट (गुजरात) पहुंचे और वहां से विशाल को साथ लेकर केवल मुझसे व्यक्तिगत रूप से मिलकर धन्यवाद देने के लिए जयपुर (राजस्थान) आये और फिर यहां से वापस इटावा (उत्तर प्रदेश) गये। ऐसे पल हर उपस्थित व्यक्ति को भावुक कर देने की शक्ति रखते हैं।’’
--- राहुल शर्मा
आभार -
बाल कल्याण समिति, जयपुर (राजस्थान) और इसके अध्यक्ष नरेन्द्र सिखवाल तथा सदस्य निशा पारीक, मीना यादव, आनन्द बिहारी पारीक के साथ-साथ राजकोट (गुजरात) बाल गृह के अधिकारीगण जयेश कुमार, पंकज और इन्द्रजीत का, जिला कोटा (राजस्थान) निवासी मनीष पंकज का और कोलकाता (पश्चिमी बंगाल) निवासी श्रीगोपाल तापड़िया का हृदय की गहराइयों से कोटि-कोटि आभार।